| 1 | भजन। विश्राम के दिन के लिये गीत यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना; |
| 2 | प्रात:काल को तेरी करुणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना, |
| 3 | दस तारवाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है। |
| 4 | क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूँगा। |
| 5 | हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएँ बहुत गम्भीर हैं! |
| 6 | पशु समान मनुष्य इसको नहीं समझता; और मूर्ख इसका विचार नहीं करता: |
| 7 | कि दुष्ट जो घास के समान फूलते-फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है कि वे सर्वदा के लिये नष्ट हो जाएँ, |
| 8 | परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा। |
| 9 | क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हाँ तेरे शत्रु नष्ट होंगे; सब अनर्थकारी तितर बितर होंगे। |
| 10 | परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली साँड़ का सा ऊँचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूँ। |
| 11 | मैं अपने शत्रुओं पर दृष्टि करके, और उन कुकर्मियों का हाल जो मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूँ। |
| 12 | धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे। |
| 13 | वे यहोवा के भवन में रोपे जाकर, हमारे परमेश्वर के आँगनों में फूले फलेंगे। |
| 14 | वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे, |
| 15 | जिस से यह प्रगट हो कि यहोवा सच्चा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं। |