यह पाठ अन्य भाषाओं में उपलब्ध है:
1 बेबीलोन की नहरों के किनारे हम लोग बैठ गए, और सिय्योन को स्मरण करके रो पड़े।
2 उसके बीच के मजनू वृक्षों पर हम ने अपनी वीणाओं को टाँग दिया;
3 क्योंकि जो हम को बन्दी बना कर ले गए थे, उन्होंने वहाँ हम से गीत गवाना चाहा, और हमारे रुलानेवालों ने हम से आनन्द चाहकर कहा, “सिय्योन के गीतों में से हमारे लिये कोई गीत गाओ!”
4 हम यहोवा के गीत को, पराए देश में कैसे गाएँ?
5 हे यरूशलेम, यदि मैं तुझे भूल जाऊँ, तो मेरा दाहिना हाथ सूख जाए!
6 यदि मैं तुझे स्मरण न रखूँ, यदि मैं यरूशलेम को, अपने सब आनन्द से श्रेष्‍ठ न जानूँ, तो मेरी जीभ तालू से चिपट जाए!
7 हे यहोवा, यरूशलेम के दिन को एदोमियों के विरुद्ध स्मरण कर, कि वे कैसे कहते थे, “ढाओ! उसको नींव से ढा दो!”
8 हे बेबीलोन, तू जो उजड़नेवाली है, क्या ही धन्य वह होगा, जो तुझ से ऐसा ही बर्ताव करेगा जैसा तू ने हम से किया है!
9 क्या ही धन्य वह होगा, जो तेरे बच्‍चों को पकड़कर, चट्टान पर पटक देगा!
← पीछे का अंत
137
भजन
आगे →
आप पद संख्या पर क्लिक करके पद को चुन सकते हैं। काम करता है
Shift
और
Ctrl