| 1 | प्रधान बजानेवाले के लिये दाऊद का भजन परमेश्वर उठे, उसके शत्रु तितर-बितर हों; और उसके बैरी उसके सामने से भाग जाएँ! |
| 2 | जैसे धूआँ उड़ जाता है, वैसे ही तू उनको उड़ा दे; जैसे मोम आग की आँच से पिघल जाता है, वैसे ही दुष्ट लोग परमेश्वर की उपस्थिति से नष्ट हों। |
| 3 | परन्तु धर्मी आनन्दित हों, वे परमेश्वर के सामने प्रफुल्लित हों; वे आनन्द में मगन हों! |
| 4 | परमेश्वर का गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ; जो निर्जल देशों में सवार होकर चलता है, उसके लिये सड़क बनाओ; उसका नाम याह है, इसलिये तुम उसके सामने प्रफुल्लित हो! |
| 5 | परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है। |
| 6 | परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है; और बन्दियों को छुड़ाकर सम्पन्न करता है; परन्तु हठीलों को सूखी भूमि पर रहना पड़ता है। |
| 7 | हे परमेश्वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे आगे चलता था, जब तू निर्जल भूमि में सेना समेत चला, (सेला) |
| 8 | तब पृथ्वी काँप उठी, और आकाश भी परमेश्वर के सामने टपकने लगा, उधर सीनै पर्वत परमेश्वर, हाँ इस्राएल के परमेश्वर के सामने काँप उठा। |
| 9 | हे परमेश्वर, तू ने बहुतायत की वर्षा की; तेरा निज भाग बहुत सूखा था, परन्तु तूने उसको हरा-भरा किया है; |
| 10 | तेरा झुण्ड उस में बसने लगा; हे परमेश्वर, तू ने अपनी भलाई से दीन जन के लिये तैयारी की है। |
| 11 | प्रभु आज्ञा देता है, तब शुभ समाचार सुनानेवालियों की बड़ी सेना हो जाती है। |
| 12 | अपनी अपनी सेना समेत राजा भागे चले जाते हैं, और गृहस्थिन लूट को बाँट लेती है। |
| 13 | क्या तुम भेड़शाला के बीच लेट जाओगे, और ऐसी कबूतरी के समान होगे जिसके पंख चाँदी से और जिसके पर पीले सोने से मढ़े हुए हों? |
| 14 | जब सर्वशक्तिमान ने उसमें राजाओं को तितर बितर किया, तब मानो सल्मोन पर्वत पर हिम पड़ा। |
| 15 | बाशान का पहाड़ परमेश्वर का पहाड़ है; बाशान का पहाड़ बहुत शिखरवाला पहाड़ है। |
| 16 | परन्तु हे शिखरवाले पहाड़ो, तुम क्यों उस पर्वत को घूरते हो, जिसे परमेश्वर ने अपने वास के लिये चाहा है, और जहाँ यहोवा सदा वास किए रहेगा? |
| 17 | परमेश्वर के रथ बीस हज़ार, वरन् हज़ारों हज़ार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे सीनै पवित्रस्थान में है। |
| 18 | तू ऊँचे पर चढ़ा, तू लोगों को बँधुआई में ले गया; तू ने मनुष्यों से, वरन् हठीले मनुष्यों से भी भेंटें लीं, जिस से याह परमेश्वर उनमें वास करे। |
| 19 | धन्य है प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता परमेश्वर है। (सेला) |
| 20 | वही हमारे लिये बचानेवाला परमेश्वर ठहरा; यहोवा प्रभु मृत्यु से भी बचाता है। |
| 21 | निश्चय परमेश्वर अपने शत्रुओं के सिर पर, और जो अधर्म के मार्ग पर चलता रहता है, उसकी बाल भरी खोपड़ी पर मार मार के उसे चूर करेगा। |
| 22 | प्रभु ने कहा है, “मैं उन्हें बाशान से निकाल लाऊँगा; मैं उनको गहिरे सागर के तल से भी फेर ले आऊँगा, |
| 23 | कि तू अपने पाँव को लहू में डुबोए, और तेरे शत्रु तेरे कुत्तों का भाग ठहरें।” |
| 24 | हे परमेश्वर, तेरी गति देखी गई, मेरे ईश्वर, मेरे राजा की गति पवित्रस्थान में दिखाई दी है; |
| 25 | गानेवाले आगे आगे और तारवाले बाजों के बजानेवाले पीछे पीछे गए, चारों ओर कुमारियाँ डफ बजाती थीं। |
| 26 | सभाओं में परमेश्वर का, हे इस्राएल के सोते से निकले हुए लोगो, प्रभु का धन्यवाद करो। |
| 27 | वहाँ उनका अध्यक्ष छोटा बिन्यामीन है, वहाँ यहूदा के हाकिम अपने अनुचरों समेत हैं, वहाँ जबूलून और नप्ताली के भी हाकिम हैं। |
| 28 | तेरे परमेश्वर ने आज्ञा दी कि तुझे सामर्थ्य मिले; हे परमेश्वर, जो कुछ तू ने हमारे लिये किया है, उसे दृढ़ कर। |
| 29 | तेरे मन्दिर के कारण जो यरूशलेम में है, राजा तेरे लिये भेंट ले आएँगे। |
| 30 | नरकटों में रहनेवाले बनैले पशुओं को, साँड़ों के झुण्ड को, और देश देश के बछड़ों को झिड़क दे। वे चाँदी के टुकड़े लिए हुए प्रणाम करेंगे; जो लोग युद्ध से प्रसन्न रहते हैं, उनको उसने तितर बितर किया है। |
| 31 | मिस्र से अधिकारी आएँगे; कूशी अपने हाथों को परमेश्वर की ओर फुर्ती से फैलाएँगे। |
| 32 | हे पृथ्वी पर के राज्य राज्य के लोगो, परमेश्वर का गीत गाओ; प्रभु का भजन गाओ, (सेला) |
| 33 | जो सबसे ऊँचे सनातन स्वर्ग में सवार होकर चलता है; देखो वह अपनी वाणी सुनाता है, वह गम्भीर वाणी शक्तिशाली है। |
| 34 | परमेश्वर के सामर्थ्य की स्तुति करो, उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, और उसकी सामर्थ्य आकाशमण्डल में है। |
| 35 | हे परमेश्वर, तू अपने पवित्रस्थानों में भययोग्य है, इस्राएल का परमेश्वर ही अपनी प्रजा को सामर्थ्य और शक्ति का देनेवाला है। परमेश्वर धन्य है। |