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1 प्रधान बजानेवाले के लिये यहोवा के दास दाऊद का भजन दुष्‍ट जन का अपराध मेरे हृदय के भीतर यह कहता है कि परमेश्‍वर का भय उसकी दृष्‍टि में नहीं है।
2 वह अपने अधर्म के प्रगट होने और घृणित ठहरने के विषय अपने मन में चिकनी चुपड़ी बातें विचारता है।
3 उसकी बातें अनर्थ और छल की हैं; उसने बुद्धि और भलाई के काम करने से हाथ खींचा है।
4 वह अपने बिछौने पर पड़े पड़े अनर्थ की कल्पना करता है; वह अपने कुमार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है; बुराई से वह हाथ नहीं खींचता।
5 हे यहोवा, तेरी करुणा स्वर्ग में है, तेरी सच्‍चाई आकाशमण्डल तक पहुँची है।
6 तेरा धर्म ऊँचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं; हे यहोवा, तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।
7 हे परमेश्‍वर, तेरी करुणा कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखों के तले शरण लेते हैं।
8 वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्‍त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा।
9 क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाएँगे।
10 अपने जाननेवालों पर करुणा करता रह, और अपने धर्म के काम सीधे मनवालों में करता रह!
11 अहंकारी मुझ पर लात उठाने न पाए, और न दुष्‍ट अपने हाथ के बल से मुझे भगाने पाए।
12 वहाँ अनर्थकारी गिर पड़े हैं; वे ढकेल दिए गए, और फिर उठ न सकेंगे।
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