| 1 | गीत। आसाप का भजन हे परमेश्वर, मौन न रह; हे परमेश्वर, चुप न रह, और न शान्त रह! |
| 2 | क्योंकि देख तेरे शत्रु हंगामा मचा रहे हैं; और तेरे बैरियों ने सिर उठाया है। |
| 3 | वे चतुराई से तेरी प्रजा की हानि की सम्मति करते, और तेरे रक्षित लोगों के विरुद्ध युक्तियाँ निकालते हैं। |
| 4 | उन्होंने कहा, “आओ, हम उनका ऐसा नाश करें कि राज्य भी मिट जाए; और इस्राएल का नाम आगे को स्मरण न रहे।” |
| 5 | उन्होंने एक मन होकर युक्ति निकाली है, और तेरे ही विरुद्ध वाचा बाँधी है। |
| 6 | ये तो एदोम के तम्बूवाले और इश्माएली, मोआबी और हुग्री, |
| 7 | गबाली, अम्मोनी, अमालेकी, और सोर समेत पलिश्ती हैं। |
| 8 | इनके संग अश्शूरी भी मिल गए हैं; उन से भी लूतवंशियों को सहारा मिला है। (सेला) |
| 9 | इन से ऐसा कर जैसा मिद्यानियों से, और कीशोन नाले में सीसरा और याबीन से किया था, |
| 10 | जो एन्दोर में नष्ट हुए, और भूमि के लिये खाद बन गए। |
| 11 | इनके रईसों को ओरेब और जाएब सरीखे, और इनके सब प्रधानों को जेबह और सल्मुन्ना के समान कर दे, |
| 12 | जिन्होंने कहा था, “हम परमेश्वर की चराइयों के अधिकारी आप ही हो जाएँ।” |
| 13 | हे मेरे परमेश्वर, इनको बवन्डर की धूलि, या पवन से उड़ाए हुए भूसे के समान कर दे। |
| 14 | उस आग के समान जो वन को भस्म करती है, और उस लौ के समान जो पहाड़ों को जला देती है, |
| 15 | तू इन्हें अपनी आँधी से भगा दे, और अपने बवन्डर से घबरा दे! |
| 16 | इनके मुँह को अति लज्जित कर, कि हे यहोवा ये तेरे नाम को ढूँढ़ें। |
| 17 | ये सदा के लिये लज्जित और घबराए रहें, इनके मुँह काले हों, और इनका नाश हो जाए, |
| 18 | जिससे ये जानें कि केवल तू जिसका नाम यहोवा है, सारी पृथ्वी के ऊपर परमप्रधान है। |