| 1 | यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है! |
| 2 | इस्राएल कहे, उसकी करुणा सदा की है। |
| 3 | हारून का घराना कहे, उसकी करुणा सदा की है। |
| 4 | यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करुणा सदा की है। |
| 5 | मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुनकर, मुझे चौड़े स्थान में पहुँचाया। |
| 6 | यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूँगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? |
| 7 | यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है; मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर सन्तुष्ट हूँगा। |
| 8 | यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है। |
| 9 | यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है। |
| 10 | सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा! |
| 11 | उन्होंने मुझ को घेर लिया है, नि:सन्देह घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा! |
| 12 | उन्होंने मुझे मधुमक्खियों के समान घेर लिया है, परन्तु काँटों की आग के समान वे बुझ गए; यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा! |
| 13 | तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पड़ूँ, परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की। |
| 14 | परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है। |
| 15 | धर्मियों के तम्बुओं में जयजयकार और उद्धार की ध्वनि हो रही है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है, |
| 16 | यहोवा का दाहिना हाथ महान् हुआ है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है! |
| 17 | मैं न मरूँगा वरन् जीवित रहूँगा, और परमेश्वर के कामों का वर्णन करता रहूँगा। |
| 18 | परमेश्वर ने मेरी बड़ी ताड़ना तो की है, परन्तु मुझे मृत्यु के वश में नहीं किया। |
| 19 | मेरे लिये धर्म के द्वार खोलो, मैं उन से प्रवेश करके याह का धन्यवाद करूँगा। |
| 20 | यहोवा का द्वार यही है, इससे धर्मी प्रवेश करने पाएँगे। |
| 21 | हे यहोवा, मैं तेरा धन्यवाद करूँगा, क्योंकि तू ने मेरी सुन ली है, और मेरा उद्धार ठहर गया है। |
| 22 | राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया है। |
| 23 | यह तो यहोवा की ओर से हुआ है, यह हमारी दृष्टि में अद्भुत है। |
| 24 | आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है; हम इसमें मगन और आनन्दित हों। |
| 25 | हे यहोवा, विनती सुन, उद्धार कर! हे यहोवा, विनती सुन, सफलता दे! |
| 26 | धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है! हम ने तुम को यहोवा के घर से आशीर्वाद दिया है। |
| 27 | यहोवा परमेश्वर है, और उसने हम को प्रकाश दिया है। यज्ञपशु को वेदी के सींगों से रस्सियों से बाँधो! |
| 28 | हे यहोवा, तू मेरा परमेश्वर है, मैं तेरा धन्यवाद करूँगा; तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझ को सराहूँगा। |
| 29 | यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा बनी रहेगी! |