| 1 | दाऊद का भजन हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! |
| 2 | हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। |
| 3 | वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, |
| 4 | वही तो तेरे प्राण को नष्ट होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करुणा और दया का मुकुट बाँधता है, |
| 5 | वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब के समान नई हो जाती है। |
| 6 | यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है। |
| 7 | उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए। |
| 8 | यहोवा दयालु और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है। |
| 9 | वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा। |
| 10 | उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। |
| 11 | जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊँचा है, वैसे ही उसकी करुणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है। |
| 12 | उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है। |
| 13 | जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है। |
| 14 | क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है। |
| 15 | मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है, |
| 16 | जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है। |
| 17 | परन्तु यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है। |
| 18 | अर्थात् उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण करके उन पर चलते हैं। |
| 19 | यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है। |
| 20 | हे यहोवा के दूतो, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो! |
| 21 | हे यहोवा की सारी सेनाओ, हे उसके टहलुओ, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो! |
| 22 | हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह! |