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प्रधान बजानेवाले के लिये दाऊद का भजन क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा।
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2
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यहोवा उसकी रक्षा करके उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। तू उसको शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़।
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3
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जब वह व्याधि के मारे शय्या पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा; तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा।
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4
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मैं ने कहा, “हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर; मुझ को चंगा कर, क्योंकि मैं ने तेरे विरुद्ध पाप किया है!”
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5
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मेरे शत्रु यह कहकर मेरी बुराई करते हैं: “वह कब मरेगा, और उसका नाम कब मिटेगा।”
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6
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जब वह मुझ से मिलने को आता है, तब वह व्यर्थ बातें बकता है, जब कि उसका मन अपने अन्दर अधर्म की बातें संचय करता है; और बाहर जाकर उनकी चर्चा करता है।
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7
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मेरे सब बैरी मिलकर मेरे विरुद्ध कानाफूसी करते हैं; वे मेरे ही विरुद्ध होकर मेरी हानि की कल्पना करते हैं।
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8
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वे कहते हैं, “इसे तो कोई बुरा रोग लग गया है; अब जो यह पड़ा है, तो फिर कभी उठने का नहीं।”
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9
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मेरा परम मित्र जिस पर मैं भरोसा रखता था, जो मेरी रोटी खाता था, उसने भी मेरे विरुद्ध लात उठाई है।
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10
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परन्तु हे यहोवा, तू मुझ पर अनुग्रह करके मुझ को उठा, कि मैं उनको बदला दूँ।
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11
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मेरा शत्रु जो मुझ पर जयवन्त नहीं हो पाता, इससे मैं ने जान लिया है कि तू मुझ से प्रसन्न है।
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12
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मुझे तो तू खराई में सम्भालता, और सर्वदा के लिये अपने सम्मुख स्थिर करता है।
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13
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इस्राएल का परमेश्वर यहोवा आदि से अनन्तकाल तक धन्य है आमीन, फिर आमीन।
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