| 1 | प्रधान बजानेवाले के लिये शोशन्नीमेदूत राग में आसाप का भजन। हे इस्राएल के चरवाहे, तू जो यूसुफ की अगुवाई भेड़ों की सी करता है, कान लगा! तू जो करूबों पर विराजमान है, अपना तेज दिखा! |
| 2 | एप्रैम, बिन्यामीन, और मनश्शे के सामने अपना पराक्रम दिखाकर, हमारा उद्धार करने को आ! |
| 3 | हे परमेश्वर, हम को ज्यों का त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा। |
| 4 | हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, तू कब तक अपनी प्रजा की प्रार्थना पर क्रोधित रहेगा? |
| 5 | तू ने आँसुओं को उनका आहार बना दिया, और मटके भर भरके उन्हें आँसू पिलाए हैं। |
| 6 | तू हमें हमारे पड़ोसियों के झगड़ने का कारण बना देता है, और हमारे शत्रु मनमाना ठट्ठा करते हैं। |
| 7 | हे सेनाओं के परमेश्वर, हम को ज्यों का त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा। |
| 8 | तू मिस्र से एक दाखलता ले आया; और अन्यजातियों को निकालकर उसे लगा दिया। |
| 9 | तू ने उसके लिये स्थान तैयार किया है; और उसने जड़ पकड़ी और फैलकर देश को भर दिया। |
| 10 | उसकी छाया पहाड़ों पर फैल गई, और उसकी डालियाँ ईश्वर के देवदारों के समान हुईं; |
| 11 | उसकी शाखाएँ समुद्र तक बढ़ गईं, और उसके अँकुर महानद तक फैल गए। |
| 12 | फिर तू ने उसके बाड़ों को क्यों गिरा दिया, कि सब बटोही उसके फलों को तोड़ते हैं? |
| 13 | जंगली सूअर उसको नष्ट किए डालता है, और मैदान के सब पशु उसे चर जाते हैं। |
| 14 | हे सेनाओं के परमेश्वर, फिर आ! स्वर्ग से ध्यान देकर देख, और इस दाखलता की सुधि ले, |
| 15 | यह पौधा तू ने अपने दाहिने हाथ से लगाया, और जो लता की शाखा तू ने अपने लिये दृढ़ की है। |
| 16 | वह जल गई, वह कट गई है; तेरी घुड़की से वे नष्ट हो जाएँ। |
| 17 | तेरे दाहिने हाथ के सम्भाले हुए पुरुष पर तेरा हाथ रखा रहे, उस आदमी पर, जिसे तू ने अपने लिये दृढ़ किया है। |
| 18 | तब हम लोग तुझ से न मुड़ेंगे: तू हम को जिला, और हम तुझ से प्रार्थना कर सकेंगे। |
| 19 | हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हम को ज्यों का त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा! |