| 1 | तब नामाती सोपर ने कहा, |
| 2 | “मेरा जी चाहता है कि उत्तर दूँ, और इसलिये बोलने में फुर्ती करता हूँ। |
| 3 | मैं ने ऐसी चितौनी सुनी जिस से मेरी निन्दा हुई, और मेरी आत्मा अपनी समझ के अनुसार तुझे उत्तर देती है। |
| 4 | क्या तू यह नियम नहीं जानता जो प्राचीन और उस समय का है, जब मनुष्य पृथ्वी पर बसाया गया, |
| 5 | कि दुष्टों का ताली बजाना जल्दी बन्द हो जाता और भक्तिहीनों का आनन्द पल भर का होता है? |
| 6 | चाहे ऐसे मनुष्य का माहात्म्य आकाश तक पहुँच जाए, और उसका सिर बादलों तक पहुँचे, |
| 7 | तौभी वह अपनी विष्ठा के समान सदा के लिये नष्ट हो जाएगा; और जो उसको देखते थे वे पूछेंगे कि वह कहाँ रहा? |
| 8 | वह स्वप्न के समान लोप हो जाएगा और किसी को फिर न मिलेगा; रात में देखे हुए रूप के समान वह रहने न पाएगा। |
| 9 | जिसने उसको देखा हो फिर उसे न देखेगा, और अपने स्थान पर उसका कुछ पता न रहेगा। |
| 10 | उसके बाल-बच्चे कंगालों से भी विनती करेंगे, और वह अपने ही हाथों से अपना माल लौटा देगा। |
| 11 | उसकी हड्डियों में जवानी का बल भरा हुआ है परन्तु वह उसी के साथ मिट्टी में मिल जाएगा। |
| 12 | “चाहे बुराई उसको मीठी लगे, और वह उसे अपनी जीभ के नीचे छिपा रखे, |
| 13 | और वह उसे बचा रखे और न छोड़े, वरन् उसे अपने तालू के बीच दबा रखे, |
| 14 | तौभी उसका भोजन उसके पेट में पलटेगा, वह उसके अन्दर नाग का सा विष बन जाएगा। |
| 15 | उसने जो धन निगल लिया है उसे वह फिर उगल देगा; परमेश्वर उसे उसके पेट में से निकाल देगा। |
| 16 | वह नागों का विष चूस लेगा, वह करैत के डसने से मर जाएगा। |
| 17 | वह नदियों अर्थात् मधु और दही की नदियों को देखने न पाएगा। |
| 18 | जिसके लिये उसने परिश्रम किया, उसको उसे लौटा देना पड़ेगा, और वह उसे निगलने न पाएगा; उसकी मोल ली हुई वस्तुओं से जितना आनन्द होना चाहिये, उतना उसे न मिलेगा। |
| 19 | क्योंकि उसने कंगालों को पीसकर छोड़ दिया, उसने घर को छीन लिया, उसको वह बढ़ाने न पाएगा। |
| 20 | “लालसा के मारे उसको कभी शान्ति नहीं मिलती थी, इसलिये वह अपनी कोई मनभावनी वस्तु बचा न सकेगा। |
| 21 | कोई वस्तु उसका कौर बिना हुए न बचती थी; इसलिये उसका कुशल बना न रहेगा। |
| 22 | पूरी सम्पत्ति रहते हुए भी वह सकेती में पड़ेगा; तब सब दु:खियों के हाथ उस पर उठेंगे। |
| 23 | ऐसा होगा कि उसका पेट भरने के लिये परमेश्वर अपना क्रोध उस पर भड़काएगा, और रोटी खाने के समय वह उस पर पड़ेगा। |
| 24 | वह लोहे के हथियार से भागेगा, और पीतल के धनुष से मारा जाएगा। |
| 25 | वह उस तीर को खींचकर अपने पेट से निकालेगा, उसकी चमकीली नोंक उसके पित्ते से होकर निकलेगी, भय उसमें समाएगा। |
| 26 | उसके गड़े हुए धन पर घोर अन्धकार छा जाएगा वह ऐसी आग से भस्म होगा, जो मनुष्य की फूँकी हुई न हो; और उसी से उसके डेरे में जो बचा हो वह भी भस्म हो जाएगा। |
| 27 | आकाश उसका अधर्म प्रगट करेगा, और पृथ्वी उसके विरुद्ध खड़ी होगी। |
| 28 | उसके घर की बढ़ती जाती रहेगी, वह परमेश्वर के क्रोध के दिन बह जाएगी। |
| 29 | परमेश्वर की ओर से दुष्ट मनुष्य का अंश, और उसके लिये परमेश्वर का ठहराया हुआ भाग यही है।” |