| 1 | “मेरा प्राण निकलने पर है, मेरे दिन पूरे हो चुके हैं; मेरे लिये कब्र तैयार है। |
| 2 | निश्चय जो मेरे संग हैं वे ठट्ठा करनेवाले हैं, और उनका झगड़ा रगड़ा मुझे लगातार दिखाई देता है। |
| 3 | “ज़मानत दे, अपने और मेरे बीच में तू ही ज़ामिन हो; कौन है जो मेरे हाथ पर हाथ मारे? |
| 4 | तू ने इनके मन को समझने से रोका है, इस कारण तू इनको प्रबल न होने देगा। |
| 5 | जो लूट के भाग के लिये अपने मित्रों की चुगली खाता है, उसके लड़कों की आँखें अंधी हो जाएँगी। |
| 6 | “उसने ऐसा किया कि सब लोग मेरी उपमा देते हैं; और लोग मेरे मुँह पर थूकते हैं। |
| 7 | खेद के मारे मेरी आँखों में धुंधलापन छा गया है, और मेरे सब अंग छाया के समान हो गए हैं। |
| 8 | इसे देखकर सीधे लोग चकित होते हैं, और जो निर्दोष हैं, वे भक्तिहीन के विरुद्ध भड़क उठते हैं। |
| 9 | तौभी धर्मी लोग अपना मार्ग पकड़े रहेंगे, और शुद्ध काम करनेवाले सामर्थ्य पर सामर्थ्य पाते जाएँगे। |
| 10 | तुम सब के सब मेरे पास आओ तो आओ, परन्तु मुझे तुम लोगों में एक भी बुद्धिमान न मिलेगा। |
| 11 | मेरे दिन तो बीत चुके, और मेरी योजनाएँ मिट गईं, और जो मेरे मन में था, वह नष्ट हुआ है। |
| 12 | वे रात को दिन ठहराते; वे कहते हैं, अन्धियारे के निकट उजियाला है। |
| 13 | यदि मेरी आशा यह हो कि अधोलोक मेरा धाम होगा, यदि मैं ने अन्धियारे में अपना बिछौना बिछा लिया है, |
| 14 | यदि मैं ने सड़ाहट से कहा, ‘तू मेरा पिता है,’ और कीड़े से कि, ‘तू मेरी माँ’, और ‘मेरी बहिन है,’ |
| 15 | तो मेरी आशा कहाँ रही? मेरी आशा किस के देखने में आएगी? |
| 16 | क्या वह अधोलोक में उतर जाएगी? क्या उस समेत मुझे भी मिट्टी में विश्राम मिलेगा?” |