| 1 | तब शूही बिलदद ने कहा, |
| 2 | “तुम कब तक फन्दे लगा लगाकर वचन पकड़ते रहोगे? चित्त लगाओ, तब हम बोलेंगे। |
| 3 | हम लोग तुम्हारी दृष्टि में क्यों पशु के तुल्य समझे जाते, और अशुद्ध ठहरे हैं। |
| 4 | हे अपने को क्रोध में फाड़नेवाले क्या तेरे निमित्त पृथ्वी उजड़ जाएगी, और चट्टान अपने स्थान से हट जाएगी? |
| 5 | “निश्चय दुष्टों का दीपक बुझ जाएगा, और उसकी आग की लौ न चमकेगी। |
| 6 | उसके डेरे में का उजियाला अन्धेरा हो जाएगा, और उसके ऊपर का दिया बुझ जाएगा। |
| 7 | उसके बड़े बड़े डग छोटे हो जाएँगे, और वह अपनी ही युक्ति के द्वारा गिरेगा। |
| 8 | वह अपना ही पाँव जाल में फँसाएगा, वह फन्दों पर चलता है। |
| 9 | उसकी एड़ी फन्दे में फँस जाएगी, और वह जाल में पकड़ा जाएगा। |
| 10 | फन्दे की रस्सियाँ उसके लिये भूमि में, और जाल रास्ते में छिपा दिया गया है। |
| 11 | चारों ओर से डरावनी वस्तुएँ उसे डराएँगी और उसके पीछे पड़कर उसको भगाएँगी। |
| 12 | उसका बल दु:ख से घट जाएगा, और विपत्ति उसके पास ही तैयार रहेगी। |
| 13 | वह उसके अंग को खा जाएगी, वरन् काल का पहिलौठा उसके अंगों को खा लेगा। |
| 14 | अपने जिस डेरे का भरोसा वह करता है, उससे वह छीन लिया जाएगा; और वह भयंकरता के राजा के पास पहुँचाया जाएगा। |
| 15 | जो उसके यहाँ का नहीं है वह उसके डेरे में वास करेगा, और उसके घर पर गन्धक छितराई जाएगी। |
| 16 | उसकी जड़ सूख जाएगी, और डालियाँ कट जाएँगी। |
| 17 | पृथ्वी पर से उसका स्मरण मिट जाएगा, और बाजार में उसका नाम कभी न सुन पड़ेगा। |
| 18 | वह उजियाले से अन्धियारे में ढकेल दिया जाएगा, और जगत में से भी भगाया जाएगा। |
| 19 | उसके कुटुम्बियों में उसके कोई पुत्र-पौत्र न रहेगा, और जहाँ वह रहता था, वहाँ कोई बचा न रहेगा। |
| 20 | उसका दिन देखकर पश्चिम के लोग चकित होंगे, और पूरब के निवासियों के रोएँ खड़े हो जाएँगे। |
| 21 | नि:सन्देह कुटिल लोगों के निवास ऐसे हो जाते हैं, और जिसको परमेश्वर का ज्ञान नहीं रहता उसका स्थान ऐसा ही हो जाता है।” |