| 1 | “गोत्रों के भाग ये हों: उत्तरी सीमा से लगा हुआ हेतलोन के मार्ग के पास से हमात की घाटी तक, और दमिश्क की सीमा के पास के हसरेनान से उत्तर की ओर हमात के पास तक एक भाग दान का हो; और उसकी पूर्वी और पश्चिमी सीमा भी हों। |
| 2 | दान की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक आशेर का एक भाग हो। |
| 3 | आशेर की सीमा से लगा हुआ, पूर्व से पश्चिम तक नप्ताली का एक भाग हो। |
| 4 | नप्ताली की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक मनश्शे का एक भाग। |
| 5 | मनश्शे की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक एप्रैम का एक भाग हो। |
| 6 | एप्रैम की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक रूबेन का एक भाग हो। |
| 7 | रूबेन की सीमा से लगा हुआ, पूर्व से पश्चिम तक यहूदा का एक भाग हो। |
| 8 | “यहूदा की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक वह अर्पण किया हुआ भाग हो, जिसे तुम्हें अर्पण करना होगा, वह पच्चीस हज़ार बाँस चौड़ा और पूर्व से पश्चिम तक किसी एक गोत्र के भाग के तुल्य लम्बा हो, और उसके बीच में पवित्रस्थान हो। |
| 9 | जो भाग तुम्हें यहोवा को अर्पण करना होगा, उसकी लम्बाई पच्चीस हज़ार बाँस और चौड़ाई दस हज़ार बाँस की हो। |
| 10 | यह अर्पण किया हुआ पवित्र भाग याजकों को मिले; वह उत्तर की ओर पच्चीस हज़ार बाँस लम्बा, पश्चिम की ओर दस हज़ार बाँस चौड़ा, पूर्व ओर दस हज़ार बाँस चौड़ा और दक्षिण की ओर पच्चीस हज़ार बाँस लम्बा हो; और उसके बीचोबीच यहोवा का पवित्रस्थान हो। |
| 11 | यह विशेष पवित्र भाग सादोक की सन्तान के उन याजकों का हो जो मेरी आज्ञाओं का पालन करते रहे, और इस्राएलियों के भटक जाने के समय लेवियों के समान न भटके थे। |
| 12 | इसलिये देश के अर्पण किए हुए भाग में से यह उनके लिये अर्पण किया हुआ भाग अर्थात् परमपवित्र देश ठहरे; और लेवियों की सीमा से लगा रहे। |
| 13 | याजकों की सीमा से लगा हुआ लेवियों का भाग हो, वह पच्चीस हज़ार बाँस लम्बा और दस हज़ार बाँस चौड़ा हो। सारी लम्बाई पच्चीस हज़ार बाँस की और चौड़ाई दस हज़ार बाँस की हो। |
| 14 | वे उसमें से न तो कुछ बेचें, न दूसरी भूमि से बदलें; और न भूमि की पहली उपज और किसी को दी जाए। क्योंकि वह यहोवा के लिये पवित्र है। |
| 15 | “चौड़ाई के पच्चीस हज़ार बाँस के सामने जो पाँच हज़ार बचा रहेगा, वह नगर और बस्ती और चराई के लिये साधारण भाग हो; और नगर उसके बीच में हो। |
| 16 | नगर की यह माप हो, अर्थात् उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की ओर साढ़े चार चार हज़ार हाथ। |
| 17 | नगर के पास उत्तर, दक्षिण, पूर्व पश्चिम में चराइयाँ हों। जो ढाई ढाई सौ बाँस चौड़ी हों। |
| 18 | अर्पण किए हुए पवित्र भाग के पास की लम्बाई में से जो कुछ बचे, अर्थात् पूर्व और पश्चिम दोनों ओर दस दस हज़ार बाँस जो अर्पण किए हुए भाग के पास हो, उसकी उपज नगर में परिश्रम करनेवालों के खाने के लिये हो। |
| 19 | इस्राएल के सारे गोत्रों में से जो नगर में परिश्रम करें, वे उसकी खेती किया करें। |
| 20 | सारा अर्पण किया हुआ भाग पच्चीस हज़ार बाँस लम्बा और पच्चीस हज़ार बाँस चौड़ा हो; तुम्हें चौकोर पवित्र भाग अर्पण करना होगा जिसमें नगर की विशेष भूमि हो। |
| 21 | “जो भाग रह जाए, वह प्रधान को मिले। पवित्र अर्पण किए हुए भाग के, और नगर की विशेष भूमि के दोनों ओर अर्थात् उनके पूर्व और पश्चिम की ओर के पच्चीस पच्चीस हज़ार बाँस की चौड़ाई के पास, जो और गोत्रों के भागों के पास रहे, वह प्रधान को मिले। अर्पण किया हुआ पवित्र भाग और भवन का पवित्रस्थान उनके बीच में हो। |
| 22 | जो प्रधान का भाग होगा, वह लेवियों के बीच और नगरों की विशेष भूमि हो। प्रधान का भाग यहूदा और बिन्यामीन की सीमा के बीच में हो। |
| 23 | “अन्य गोत्रों के भाग इस प्रकार हों: पूर्व से पश्चिम तक बिन्यामीन का एक भाग हो। |
| 24 | बिन्यामीन की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक शिमोन का एक भाग। |
| 25 | शिमोन की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक इस्साकार का एक भाग। |
| 26 | इस्साकार की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक जबूलून का एक भाग। |
| 27 | जबूलून की सीमा से लगा हुआ पूर्व से पश्चिम तक गाद का एक भाग। |
| 28 | और गाद की सीमा के पास दक्षिण की ओर की सीमा तामार से लेकर कादेश के मरीबोत नामक सोते तक, और मिस्र के नाले और महासागर तक पहुँचे। |
| 29 | जो देश तुम्हें इस्राएल के गोत्रों को बाँटना होगा वह यही है, और उनके भाग भी ये ही हैं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है। |
| 30 | “नगर के निकास ये हों, अर्थात् उत्तर की ओर जिसकी लम्बाई साढ़े चार हज़ार बाँस की हो। |
| 31 | उसमें तीन फाटक हों; अर्थात् एक रूबेन का फाटक, एक यहूदा का फाटक, और एक लेवी का फाटक हो; क्योंकि नगर के फाटकों के नाम इस्राएल के गोत्रों के नामों पर रखने होंगे। |
| 32 | पूर्व की ओर सीमा साढ़े चार हज़ार बाँस लम्बी हो; और उसमें तीन फाटक हों; अर्थात् एक यूसुफ का फाटक, एक बिन्यामीन का फाटक, और एक दान का फाटक हो। |
| 33 | दक्षिण की ओर सीमा साढ़े चार हज़ार बाँस लम्बी हो, और उसमें तीन फाटक हों; अर्थात् एक शिमोन का फाटक, एक इस्साकार का फाटक, और एक जबूलून का फाटक हो; |
| 34 | और पश्चिम की ओर सीमा साढ़े चार हज़ार बाँस लम्बी हो, और उसमें तीन फाटक हों; अर्थात् एक गाद का फाटक, एक आशेर का फाटक और एक नप्ताली का फाटक हो। |
| 35 | नगर के चारों ओर का घेरा अठारह हज़ार बाँस का हो, और उस दिन से आगे को नगर का नाम ‘यहोवा शाम्मा ’ रहेगा।” |