| 1 | फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा, |
| 2 | “हे मनुष्य के सन्तान, यरूशलेम को उसके सब घृणित काम जता दे, |
| 3 | और उससे कह, हे यरूशलेम, प्रभु यहोवा तुझ से यों कहता है: तेरा जन्म और तेरी उत्पत्ति कनानियों के देश से हुई; तेरा पिता तो एमोरी और तेरी माता हित्तिन थी। |
| 4 | तेरा जन्म ऐसे हुआ कि जिस दिन तू जन्मी, उस दिन न तेरा नाल काटा गया, न तू शुद्ध होने के लिए धोई गई, न तेरे कुछ लोन मला गया और न तू कुछ कपड़ों में लपेटी गई। |
| 5 | किसी की दयादृष्टि तुझ पर नहीं हुई कि इन कामों में से तेरे लिए एक भी काम किया जाता; वरन् अपने जन्म के दिन तू घृणित होने के कारण खुले मैदान में फेंक दी गई थी। |
| 6 | “जब मैं तेरे पास से होकर निकला, और तुझे लहू में लोटते हुए देखा, तब मैं ने तुझ से कहा, ‘हे लहू में लोटती हुई जीवित रह;’ हाँ, तुझ ही से मैं ने कहा, ‘हे लहू में लोटती हुई, जीवित रह।’ |
| 7 | फिर मैं ने तुझे खेत के पौधे के समान बढ़ाया, और तू बढ़ते बढ़ते बड़ी हो गई और अति सुन्दर हो गई; तेरी छातियाँ सुडौल हुईं, और तेरे बाल बढ़े, तौभी तू नंगी थी। |
| 8 | “मैं ने फिर तेरे पास से होकर जाते हुए तुझे देखा, और अब तू पूरी स्त्री हो गई थी; इसलिये मैं ने तुझे अपना वस्त्र ओढ़ाकर तेरा तन ढाँप दिया; और सौगन्ध खाकर तुझ से वाचा बाँधी, और तू मेरी हो गई, प्रभु यहोवा की यही वाणी है। |
| 9 | तब मैं ने तुझे जल से नहलाकर तुझ पर से लहू धो दिया, और तेरी देह पर तेल मला। |
| 10 | फिर मैं ने तुझे बूटेदार वस्त्र और सूइसों के चमड़े की जूतियाँ पहिनाईं; और तेरी कमर में सूक्ष्म सन बाँधा, और तुझे रेशमी कपड़ा ओढ़ाया। |
| 11 | तब मैं ने तेरा शृंगार किया, और तेरे हाथों में चूड़ियाँ और गले में हार पहिनाया। |
| 12 | फिर मैं ने तेरी नाक में नत्थ और तेरे कानों में बालियाँ पहिनाईं, और तेरे सिर पर शोभायमान मुकुट धरा। |
| 13 | तेरे आभूषण सोने चाँदी के और तेरे वस्त्र सूक्ष्म सन, रेशम और बूटेदार कपड़े के बने; फिर तेरा भोजन मैदा, मधु और तेल हुआ; और तू अत्यन्त सुन्दर, वरन् रानी होने के योग्य हो गई। |
| 14 | तेरी सुन्दरता की कीर्ति अन्यजातियों में फैल गई, क्योंकि उस प्रताप के कारण, जो मैं ने अपनी ओर से तुझे दिया था, तू अत्यन्त सुन्दर थी, प्रभु यहोवा की यही वाणी है। |
| 15 | “परन्तु तू अपनी सुन्दरता पर भरोसा करके अपनी नामवरी के कारण व्यभिचार करने लगी, और सब यात्रियों के संग बहुत कुकर्म किया, और जो कोई तुझे चाहता था तू उसी से मिलती थी। |
| 16 | तू ने अपने वस्त्र लेकर रंग-बिरंगे ऊँचे स्थान बना लिए, और उन पर व्यभिचार किया, ऐसे कुकर्म किए जो न कभी हुए और न होंगे। |
| 17 | तू ने अपने सुशोभित गहने लेकर जो मेरे दिए हुए सोने-चाँदी के थे, उन से पुरुषों की मूरतें बना लीं, और उन से भी व्यभिचार करने लगी; |
| 18 | और अपने बूटेदार वस्त्र लेकर उनको पहिनाए, और मेरा तेल और मेरा धूप उनके सामने चढ़ाया। |
| 19 | जो भोजन मैं ने तुझे दिया था, अर्थात् जो मैदा, तेल और मधु मैं तुझे खिलाता था, वह सब तू ने उनके सामने सुखदायक सुगन्ध करके रखा; प्रभु यहोवा की यही वाणी है कि यों ही हुआ। |
| 20 | फिर तू ने अपने पुत्र-पुत्रियाँ लेकर जिन्हें तू ने मेरे लिये जन्म दिया, उन मूरतों को नैवेद्य करके चढ़ाईं। क्या तेरा व्यभिचार ऐसी छोटी बात थी; |
| 21 | कि तू ने मेरे बाल-बच्चे उन मूरतों के आगे आग में चढ़ाकर घात किए हैं? |
| 22 | तू ने अपने सब घृणित कामों में और व्यभिचार करते हुए, अपने बचपन के दिनों की कभी सुधि न ली, जब कि तू नंगी अपने लहू में लोटती थी। |
| 23 | “तेरी उस सारी बुराई के पीछे क्या हुआ? प्रभु यहोवा की यह वाणी है, हाय, तुझ पर हाय! |
| 24 | तू ने एक गुम्मट बनवा लिया, और हर एक चौक में एक ऊँचा स्थान बनवा लिया; |
| 25 | और एक एक सड़क के सिरे पर भी तू ने अपना ऊँचा स्थान बनवाकर अपनी सुन्दरता घृणित करा दी, और हर एक यात्री को कुकर्म के लिये बुलाकर महाव्यभिचारिणी हो गई। |
| 26 | तू ने अपने पड़ोसी मिस्री लोगों से भी, जो मोटे-ताजे हैं, व्यभिचार किया और मुझे क्रोध दिलाने के लिए अपना व्यभिचार बढ़ाती गई। |
| 27 | इस कारण मैं ने अपना हाथ तेरे विरुद्ध बढ़ाकर, तेरा प्रतिदिन का खाना घटा दिया, और तेरी बैरिन पलिश्ती स्त्रियाँ जो तेरे महापाप की चाल से लजाती हैं, उनकी इच्छा पर मैं ने तुझे छोड़ दिया है। |
| 28 | फिर भी तेरी तृष्णा न बुझी, इसलिये तू ने अश्शूरी लोगों से भी व्यभिचार किया; और उनसे व्यभिचार करने पर भी तेरी तृष्णा न बुझी। |
| 29 | फिर तू लेन देन के देश में व्यभिचार करते करते कसदियों के देश तक पहुँची, और वहाँ भी तेरी तृष्णा न बुझी। |
| 30 | “प्रभु यहोवा की यह वाणी है, कि तेरा हृदय कैसा चंचल है कि तू ये सब काम करती है, जो निर्लज्ज वेश्या ही के काम हैं! |
| 31 | तू ने हर एक सड़क के सिरे पर जो अपना गुम्मट, और हर चौक में अपना ऊँचा स्थान बनवाया है, क्या इसी में तू वेश्या के समान नहीं ठहरी? क्योंकि तू ऐसी कमाई पर हँसती है। |
| 32 | तू व्यभिचारिणी पत्नी है। तू पराये पुरुषों को अपने पति के बदले ग्रहण करती है। |
| 33 | सब वेश्याओं को तो रुपया मिलता है, परन्तु तू ने अपने सब मित्रों को स्वयं रुपए देकर, और उनको लालच दिखाकर बुलाया है कि वे चारों ओर से आकर तुझ से व्यभिचार करें। |
| 34 | इस प्रकार तेरा व्यभिचार अन्य व्यभिचारियों से उलटा है। तेरे पीछे कोई व्यभिचारी नहीं चलता, और तू किसी से दाम लेती नहीं, वरन् तू ही देती है; इसी कारण तू उलटी ठहरी। |
| 35 | “इस कारण, हे वेश्या, यहोवा का वचन सुन, |
| 36 | प्रभु यहोवा यों कहता है: तू ने जो व्यभिचार में अति निर्लज्ज होकर, अपनी देह अपने मित्रों को दिखाई, और अपनी मूरतों से घृणित काम किए, और अपने बच्चों का लहू बहाकर उन्हें बलि चढ़ाया है, |
| 37 | इस कारण देख, मैं तेरे सब मित्रों को जो तेरे प्रेमी हैं और जितनों से तू ने प्रीति लगाई, और जितनों से तू ने बैर रखा, उन सभों को चारों ओर से तेरे विरुद्ध इकट्ठा करके उनको तेरी देह नंगी करके दिखाऊँगा, और वे तेरा तन देखेंगे। |
| 38 | तब मैं तुझ को ऐसा दण्ड दूँगा, जैसा व्यभिचारिणियों और लहू बहानेवाली स्त्रियों को दिया जाता है; और क्रोध और जलन के साथ तेरा लहू बहाऊँगा। |
| 39 | इस रीति मैं तुझे उनके वश में कर दूँगा; और वे तेरे गुम्मटों को ढा देंगे, और तेरे ऊँचे स्थानों को तोड़ देंगे, वे तेरे वस्त्र जबरन उतारेंगे, और तेरे सुन्दर गहने छीन लेंगे, और तुझे नंगा करके छोड़ देंगे। |
| 40 | तब तेरे विरुद्ध एक सभा इकट्ठी करके वे तुझ पर पथराव करेंगे, और अपनी कटारों से आरपार छेदेंगे। |
| 41 | तब वे आग लगाकर तेरे घरों को जला देंगे, और तुझे बहुत सी स्त्रियों के देखते दण्ड देंगे; और मैं तेरा व्यभिचार बन्द करूँगा, और तू फिर छिनाले के लिये दाम न देगी। |
| 42 | जब मैं तुझ पर पूरी जलजलाहट प्रगट कर चुकूँगा, तब तुझ पर और न जलूँगा वरन् शान्त हो जाऊँगा, और फिर न रिसियाऊँगा। |
| 43 | तू ने जो अपने बचपन के दिन स्मरण नहीं रखे, वरन् इन सब बातों के द्वारा मुझे चिढ़ाया, इस कारण मैं तेरा चालचलन तेरे सिर पर डालूँगा और तू अपने सब पिछले घृणित कामों से और अधिक महापाप न करेगी, प्रभु यहोवा की यही वाणी है। |
| 44 | “देख, सब कहावत कहनेवाले तेरे विषय यह कहावत कहेंगे, ‘जैसी माँ वैसी पुत्री।’ |
| 45 | तेरी माँ जो अपने पति और बच्चों से घृणा करती थी, तू भी ठीक उसकी पुत्री ठहरी; और तेरी बहिनें जो अपने अपने पति और बच्चों से घृणा करती थीं, तू भी ठीक उनकी बहिन निकली। तेरी माता हित्तिन और पिता एमोरी था। |
| 46 | तेरी बड़ी बहिन शोमरोन है, जो अपनी पुत्रियों समेत तेरी बाईं ओर रहती है, और तेरी छोटी बहिन, जो तेरी दाहिनी ओर रहती है वह पुत्रियों समेत सदोम है। |
| 47 | तू उनकी सी चाल नहीं चली, और न उनके से घृणित कामों ही से सन्तुष्ट हुई; यह तो बहुत छोटी बात ठहरती, परन्तु तेरा सारा चालचलन उनसे भी अधिक बिगड़ गया। |
| 48 | प्रभु यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, तेरी बहिन सदोम ने अपनी पुत्रियों समेत तेरे और तेरी पुत्रियों के समान काम नहीं किए। |
| 49 | देख, तेरी बहिन सदोम का अधर्म यह था, कि वह अपनी पुत्रियों सहित घमण्ड करती, पेट भर भरके खाती और सुख चैन से रहती थी; और दीन दरिद्र को न संभालती थी। |
| 50 | अत: वह गर्व करके मेरे सामने घृणित काम करने लगी, और यह देखकर मैं ने उन्हें दूर कर दिया। |
| 51 | फिर शोमरोन ने तेरे पापों के आधे भी पाप नहीं किए, तू ने तो उससे बढ़कर घृणित काम किए, और अपने घोर घृणित कामों के द्वारा अपनी बहिनों से जीत गयी। |
| 52 | इसलिये तू ने जो अपनी बहिनों का न्याय किया, इस कारण लज्जित हो, क्योंकि तू ने उन से बढ़कर घृणित पाप किए हैं; इस कारण वे तुझ से कम दोषी ठहरी हैं। इसलिये तू इस बात से लज्जा कर और लजाती रह, क्योंकि तू ने अपनी बहिनों को कम दोषी ठहराया है। |
| 53 | “जब मैं उनको अर्थात् पुत्रियों सहित सदोम और शोमरोन को बँधुआई से लौटा लाऊँगा, तब उनके बीच ही तेरे बन्दियों को भी लौटा लाऊँगा, |
| 54 | जिस से तू लजाती रहे, और अपने सब कामों को देखकर लजाए, क्योंकि तू उनकी शान्ति ही का कारण हुई है। |
| 55 | तेरी बहिनें सदोम और शोमरोन अपनी अपनी पुत्रियों समेत अपनी पहली दशा को फिर पहुँचेंगी, और तू भी अपनी पुत्रियों सहित अपनी पहली दशा को फिर पहुँचेगी। |
| 56 | जब तक तेरी बुराई प्रगट न हुई थी, अर्थात् जिस समय तक तू आसपास के लोगों समेत अरामी और पलिश्ती स्त्रियों की जो अब चारों ओर से तुझे तुच्छ जानती हैं, नामधराई करती थी, |
| 57 | उन अपने घमण्ड के दिनों में तो तू अपनी बहिन सदोम का नाम भी न लेती थी। |
| 58 | परन्तु अब तुझ को अपने महापाप और घृणित कामों का भार आप ही उठाना पड़ा है, यहोवा की यही वाणी है। |
| 59 | “प्रभु यहोवा यह कहता है: मैं तेरे साथ ऐसा ही बर्ताव करूँगा, जैसा तू ने किया है, क्योंकि तू ने तो वाचा तोड़कर शपथ तुच्छ जानी है, |
| 60 | तौभी मैं तेरे बचपन के दिनों की अपनी वाचा स्मरण करूँगा, और तेरे साथ सदा की वाचा बाँधूँगा। |
| 61 | जब तू अपनी बहिनों को अर्थात् अपनी बड़ी और छोटी बहिनों को ग्रहण करे, तब तू अपना चालचलन स्मरण करके लज्जित होगी; और मैं उन्हें तेरी पुत्रियाँ ठहरा दूँगा; परन्तु यह तेरी वाचा के अनुसार न करूँगा। |
| 62 | मैं तेरे साथ अपनी वाचा स्थिर करूँगा, और तब तू जान लेगी कि मैं यहोवा हूँ, |
| 63 | जिससे तू स्मरण करके लज्जित हो, और लज्जा के मारे फिर कभी मुँह न खोले। यह उस समय होगा, जब मैं तेरे सब कामों को ढाँपूँगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।” |