| 1 | इसलिये हे पवित्र भाइयो, तुम जो स्वर्गीय बुलाहट में भागी हो, उस प्रेरित और महायाजक यीशु पर जिसे हम अंगीकार करते हैं, ध्यान करो। |
| 2 | वह अपने नियुक्त करनेवाले के लिये विश्वासयोग्य था, जैसा मूसा भी परमेश्वर के सारे घर में था। |
| 3 | क्योंकि यीशु मूसा से इतना बढ़कर महिमा के योग्य समझा गया है, जितना कि घर का बनानेवाला घर से बढ़कर आदर रखता है। |
| 4 | क्योंकि हर एक घर का कोई न कोई बनानेवाला होता है, पर जिसने सब कुछ बनाया वह परमेश्वर है। |
| 5 | मूसा तो परमेश्वर के सारे घर में सेवक के समान विश्वासयोग्य रहा कि जिन बातों का वर्णन होनेवाला था, उन की गवाही दे। |
| 6 | परन्तु मसीह पुत्र के समान परमेश्वर के घर का अधिकारी है; और उस का घर हम हैं, यदि हम साहस पर और अपनी आशा के घमण्ड पर अन्त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। |
| 7 | अत: जैसा पवित्र आत्मा कहता है, “यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, |
| 8 | तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। |
| 9 | जहाँ तुम्हारे बापदादों ने मुझे जाँचकर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे। |
| 10 | इस कारण मैं उस समय के लोगों से क्रोधित रहा, और कहा, ‘इनके मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना।’ |
| 11 | तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, ‘वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएँगे’।” |
| 12 | हे भाइयो, चौकस रहो कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो तुम्हें जीवते परमेश्वर से दूर हटा ले जाए। |
| 13 | वरन् जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। |
| 14 | क्योंकि हम मसीह के भागीदार हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। |
| 15 | जैसा कहा जाता है, “यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था।” |
| 16 | भला किन लोगों ने सुनकर भी क्रोध दिलाया? क्या उन सब ने नहीं, जो मूसा के द्वारा मिस्र से निकले थे? |
| 17 | और वह चालीस वर्ष तक किन लोगों से क्रोधित रहा? क्या उन्हीं से नहीं जिन्होंने पाप किया, और उनके शव जंगल में पड़े रहे? |
| 18 | और उसने किनसे शपथ खाई कि तुम मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाओगे? क्या केवल उनसे नहीं जिन्होंने आज्ञा न मानी? |
| 19 | अत: हम देखते हैं कि वे अविश्वास के कारण प्रवेश न कर सके। |