| 1 | उसकी सास नाओमी ने उससे कहा, “हे मेरी बेटी, क्या मैं तेरे लिये ठाँव न ढूँढ़ूँ कि तेरा भला हो? |
| 2 | अब जिसकी दासियों के पास तू थी, क्या वह बोअज़ हमारा कुटुम्बी नहीं है? वह तो आज रात को खलिहान में जौ फटकेगा। |
| 3 | तू स्नान कर तेल लगा, और अच्छे वस्त्र पहिनकर खलिहान को जा; परन्तु जब तक वह पुरुष खा-पी न चुके तब तक अपने को उस पर प्रगट न करना। |
| 4 | और जब वह लेट जाए, तब तू उस के लेटने के स्थान को देख लेना; फिर भीतर जाकर उसके पाँव उघाड़ के लेट जाना; तब वही तुझे बताएगा कि तुझे क्या करना चाहिये।” |
| 5 | उसने उससे कहा, “जो कुछ तू कहती है वह सब मैं करूँगी।” |
| 6 | तब वह खलिहान को गई और अपनी सास की आज्ञा के अनुसार ही किया। |
| 7 | जब बोअज़ खा-पी चुका, और उसका मन आनन्दित हुआ, तब जाकर अनाज के ढेर के एक सिरे पर लेट गया। तब वह चुपचाप गई, और उसके पाँव उघाड़ के लेट गई। |
| 8 | आधी रात को वह पुरुष चौंक पड़ा, और आगे की ओर झुककर क्या पाया, कि उसके पाँवों के पास कोई स्त्री लेटी है। |
| 9 | उसने पूछा, “तू कौन है?” तब वह बोली, “मैं तो तेरी दासी रूत हूँ; तू अपनी दासी को अपनी चद्दर ओढ़ा दे, क्योंकि तू हमारी भूमि छुड़ानेवाला कुटुम्बी है।” |
| 10 | उसने कहा, “हे बेटी, यहोवा की ओर से तुझ पर आशीष हो; क्योंकि तू ने अपनी पिछली प्रीति पहली से अधिक दिखाई, क्योंकि तू क्या धनी क्या कंगाल, किसी जवान के पीछे नहीं लगी। |
| 11 | इसलिये अब, हे मेरी बेटी, मत डर, जो कुछ तू कहेगी मैं तुझ से करूँगा; क्योंकि मेरे नगर के सब लोग जानते हैं कि तू भली स्त्री है। |
| 12 | और सच तो है कि मैं छुड़ानेवाला कुटुम्बी हूँ, तौभी एक और है जिसे मुझ से पहले ही छुड़ाने का अधिकार है। |
| 13 | अत: रात भर ठहरी रह, और सबेरे यदि वह तेरे लिये छुड़ानेवाले का काम करना चाहे; तो अच्छा, वही ऐसा करे; परन्तु यदि वह तेरे लिये छुड़ानेवाले का काम करना न चाहे, तो यहोवा के जीवन की शपथ मैं ही वह काम करूँगा। भोर तक लेटी रह।” |
| 14 | तब वह उसके पाँवों के पास भोर तक लेटी रही, और इस से पहले कि कोई दूसरे को पहचान सके वह उठी। तब बोअज़ ने कहा, “कोई जानने न पाए कि खलिहान में कोई स्त्री आई थी।” |
| 15 | तब बोअज़ ने कहा, “जो चद्दर तू ओढ़े है उसे फैलाकर पकड़ ले। और जब उसने उसे पकड़ा तब उसने छ: नपुए जौ नापकर उसको उठा दिया; फिर वह नगर में चली गई। |
| 16 | जब रूत अपनी सास के पास आई तब उस ने पूछा, “हे बेटी, क्या हुआ?” तब जो कुछ उस पुरुष ने उससे किया था वह सब उसने उसे कह सुनाया। |
| 17 | फिर उसने कहा, “यह छ: नपुए जौ उसने यह कहकर मुझे दिया, कि अपनी सास के पास छूछे हाथ मत जा।” |
| 18 | उसने कहा, “हे मेरी बेटी, जब तक तू न जाने कि इस बात का कैसा फल निकलेगा, तब तक चुपचाप बैठी रह, क्योंकि आज उस पुरुष को यह काम बिना निपटाए चैन न पड़ेगा।” |