| 1 | हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े, |
| 2 | और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगाकर सोचे; |
| 3 | और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे, |
| 4 | और उसको चाँदी के समान ढूँढ़े, और गुप्त धन के समान उसकी खोज में लगा रहे; |
| 5 | तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा। |
| 6 | क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुँह से निकलती हैं। |
| 7 | वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है। |
| 8 | वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है। |
| 9 | तब तू धर्म और न्याय, और निष्पक्षता को, अर्थात् सब भली-भली चाल को समझ सकेगा। |
| 10 | क्योंकि बुद्धि तो तेरे हृदय में प्रवेश करेगी, और ज्ञान तुझे सुख देनेवाला लगेगा; |
| 11 | विवेक तुझे सुरक्षित रखेगा; और समझ तेरी रक्षक होगी; |
| 12 | ताकि तुझे बुराई के मार्ग से, और उलट-फेर की बातों के कहनेवालों से बचाए, |
| 13 | जो खराई के मार्ग को छोड़ देते हैं, ताकि अन्धेरे मार्ग में चलें; |
| 14 | जो बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्ट जन की उलट-फेर की बातों में मगन रहते हैं, |
| 15 | जिनकी चालचलन टेढ़ी-मेढ़ी और जिनके मार्ग बिगड़े हुए हैं। |
| 16 | तब तू पराई स्त्री से भी बचेगा जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है, |
| 17 | और अपनी जवानी के साथी को छोड़ देती, और जो अपने परमेश्वर की वाचा को भूल जाती है। |
| 18 | उसका घर मृत्यु की ढलान पर है, और उसकी डगरें मरे हुओं के बीच पहुँचाती हैं; |
| 19 | जो उसके पास जाते हैं, उनमें से कोई भी लौटकर नहीं आता; और न वे जीवन का मार्ग पाते हैं। |
| 20 | तू भले मनुष्यों के मार्ग में चल, और धर्मियों के पथ को पकड़े रह। |
| 21 | क्योंकि धर्मी लोग देश में बसे रहेंगे, और खरे लोग ही उस में बने रहेंगे। |
| 22 | दुष्ट लोग देश में से नष्ट होंगे, और विश्वासघाती उसमें से उखाड़े जाएँगे। |