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फिर यूसुफ की सन्तान का भाग चिट्ठी डालने से ठहराया गया, उनकी सीमा यरीहो के पास की यरदन नदी से, अर्थात् पूर्व की ओर यरीहो के जल से आरम्भ होकर उस पहाड़ी देश से होते हुए, जो जंगल में है, बेतेल को पहुँची;
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वहाँ से वह लूज तक पहुँची, और एरेकियों की सीमा से होते हुए अतारोत पर जा निकली;
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और पश्चिम की ओर यपलेतियों की सीमा से उतरकर फिर नीचेवाली बेथोरोन की सीमा से होकर गेजेर को पहुँची, और समुद्र पर निकली।
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तब मनश्शे और एप्रैम नामक यूसुफ के दोनों पुत्रों की सन्तान ने अपना अपना भाग लिया।
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5
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एप्रैमियों की सीमा उनके कुलों के अनुसार यह ठहरी; अर्थात् उनके भाग की सीमा पूर्व से आरम्भ होकर अत्रोतदार से होते हुए ऊपरवाले बेथोरोन तक पहुँची;
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और उत्तरी सीमा पश्चिम की ओर के मिकमतात से आरम्भ होकर पूर्व की ओर मुड़कर तानतशीलो को पहुँची, और उसके पास से होते हुए यानोह तक पहुँची;
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फिर यानोह से वह अतारोत और नारा को उतरती हुई यरीहो के पास होकर यरदन पर निकली।
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फिर वही सीमा तप्पूह से निकलकर, और पश्चिम की ओर जाकर, काना के नाले तक होकर समुद्र पर निकली। एप्रैमियों के गोत्र का भाग उनके कुलों के अनुसार यही ठहरा।
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9
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और मनश्शेइयों के भाग के बीच भी कई एक नगर अपने अपने गाँवों समेत एप्रैमियों के लिये अलग किये गए।
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10
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परन्तु जो कनानी गेजेर में बसे थे उनको एप्रैमियों ने वहाँ से नहीं निकाला; इसलिये वे कनानी उनके बीच आज के दिन तक बसे हैं, और बेगारी में दास के समान काम करते हैं।
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